शनिवार, 5 अगस्त 2017

आरएसएस के कार्यकर्ताओं की केरल में हत्या: माकपा का लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले द्वारा नई दिल्ली में अगस्त 4 को  आयोजित एक संवादददता सम्मेलन में जारी किया गया वक्तव्य

आरएसएस के कार्यकर्ताओं की केरल में हत्या: माकपा का लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला
नई दिल्ली 4 अगस्त 17 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बस्ती कार्यवाह एस. एल. राजेश (34) की निर्मम हत्या ने एक बार पुन: माकपा द्वारा की जा रही हत्याओं की राजनीति की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया है।  राजेश जी  तिरुवनंतपुरम के निकट एडवाकोड के बस्ती कार्यवाह थे। पिछले 12 महीनों में यह संघ के 13वें कार्यकर्ता की हत्या है, इसके अलावा भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता को जिंदा जलाया गया।
माकपा की हत्या की राजनीति का लंबा इतिहास है। वर्ष 1969 में पहली बार केरल में संघ के कार्यकर्ता की हत्या की गई थी जब मार्क्सवादी नेताओं को लगा कि राष्ट्रीयता से परिपूर्ण इस संगठन का प्रभाव क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। तब से अब तक लगभग 300 स्वयंसेवकों की माकपा कार्यकर्ताओं द्वारा हत्या की जा चुकी है। कम्युनिस्टों के बीच इसे 'कन्नूर मॉडल' का नाम दिया गया है।
आपातकाल (1975-77) के बाद जब बड़ी संख्या में कम्युनिस्ट कार्यकर्ता संघ की ओर आ रहे थे, उस समय इन हत्याओं में  कई गुना वृद्धि हुई। इतिहास इस बात का गवाह है कि  हिंसा और हत्याओं का यह दौर केवल संघ बनाम माकपा नहीं है, जैसा कि कई बुद्धिजीवियों ने प्रदर्शित करने का प्रयास किया है; बल्कि  यह संघर्ष माकपा बनाम सभी अन्य है। जो कोई भी माकपा के अत्याचार और अन्याय के खिलाफ खड़ा होने का प्रयास करता है, फिर भले ही वह माकपा का कार्यकर्ता, क्यों न हो, उसे हिंसा का शिकार होना पड़ता है।
संघ के खिलाफ इतनी हिंसा होने के बाद भी हमने हमेशा बातचीत से मामला सुलझाने का प्रयास किया, अब तक तीन बार हम ऐसा प्रयास कर चुके हैं। हर बार इसकी प्रतिक्रिया में यां तो किसी स्वयसंवेक की निर्मम हत्या कर दी जाती है यां हमारा  उपहास किया जाता है। दुख की बात ये है कि केरल की पुलिस भी मार्क्सवादी यूनियन की तरहं काम करती है। ऐसे किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच नहीं करने दी जा रही है। केरल में कम्युनिस्टों के प्रभुत्व के मूल में 'पार्टी के गांव' हैं। ये वे गांव हैं जहां माकपा का एकछत्र आधिपत्य है, कोई अन्य राजनीतिक दल यहां अपनी कोई गतिविधि नहीं कर सकता है, यहां तक कि चुनावों में यहां प्रचार करना भी संभव नहीं हो पाता है। मुख्यमंत्री श्री पिणराई विजयन स्वयं कन्नूर से हैं तथा उन पर राजनीतिक हत्याओं का आरोप है। जब से उन्होंने राज्य में कमान संभाली है तब से यह हिंसक राजनीतिक चरमोत्कर्ष पर पहुंच गई है।  केरल में माकपा के राज्य सचिव के. बालाकृष्णन भी कन्नूर से हैं और ऐसे  आपराधिक तत्वों को प्रश्रय दे रहे हैं जो कन्नूर से बाहर निकलकर तिरूवनंतपुरम में जा पहुंचे हैं और अब पूरे राज्य में हिंसा फैला रहे हैं।
हमारे ऐसे स्वयंसेवकों पर हमला किया जा रहा है जो अत्यंत सामान्य परिवारों  व पिछड़ी जातियों से हैं। यह केवल संघ पर ही हमला नहीं है बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन और देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। इस मामले में सभी संबद्ध पक्षोंकेंद्र सरकार, मीडिया, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं तथा राजनीतिक दलोंको गंभीरता से इस विषय को लेना चाहिए और उपयुक्त कार्यवाही कर संविधान के दायरे में रहते हुए 'ईश्वर के इस अपने स्थान (गॉड्स ओन कंट्री)' को असहिष्णु कम्युनिस्ट व इस्लामिक विचारधाराओं से बचना चाहिए।

बुधवार, 26 जुलाई 2017

ढोला गांव में बाढ़ पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भोजन पैकेट तैयार करवाये और गांव में वितरित किये।

सेवा है यज्ञ कुंड-समिधा सम हम जले ।
 


ढोला गांव में बाढ़ पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,(पाली ,रानी,और सांडेराव) से  भोजन पैकेट तैयार करवाये और गांव में वितरित किये।
 

बरलूट ग्राम के संघ के कार्यकर्ताओं ने प्रस्तुत  की मानवता की अद्भुत मिशाल-  

भारी बारिश से फँसे क़रीब 500 यात्रियों के भोजन की व्यवस्था की गई आज .. संघ की सेवा के इस भगीरथ कार्य में समस्त बरलूट के ग्रामवासी भी बड़े भावसे जुड़े- एवं रात्रि उन्हें विश्राम के लिए भी पूरी व्यवस्था की गई।

(बरलूट-जावाल के बीच  आबूजी नदी रोड से क़रीब ३ फूट ऊपर बह रही होने के कारण बरलूट से आगे यात्री नहीं जा पाने से उन्हें बरलूट में रुकना पड़ा है)





राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक कर्तव्य निर्वाहन करते हुए


पाली जालोर सिरोही में  अतिवृष्टि एवं बाढ़ के हालात में राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक़ो ने  भिन्न भिन्न स्थानों पर अतिवृष्टि एवं बाढ़ से ग्रस्त   लोगों को भोजन पैकेट एवं अन्य सामग्री का वितरण किया। 

 

भुला क्षेत्र के वनवासी रोहिड़ा नदी के कारण घर नही जा सके ऐसे 70 पुरुषो एवम 10 महिला की 2 दिन से रोहिड़ा (सिरोही) के स्वयंसेवको ने रहने व भोजन की व्यवस्था की ।
 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आबूरोड (सिरोही) के स्वयंसेवको द्वारा बाढ़ पीड़ितों को भोजन एवं ठहराने की उत्तम व्यवस्था 
की गई।
 
 
 


 

सोमवार, 3 जुलाई 2017

जागरूक नागरिक पत्रकार की तरह- सुभाष त्रिवेदी

जागरूक नागरिक पत्रकार की तरह- सुभाष त्रिवेदी  
 

पाली 30 जून 17 . स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग द्वारा आयोजित संपादक के नाम पत्र लेखन व समाचार कैसे लिखें विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर के प्रचार प्रमुख अशोक राजपुरोहित ने बताया कि कार्यशाला में दैनिक मरुनाद के प्रधान संपादक सुभाष त्रिवेदी ने बताया कि प्रत्येक समाचार को समझ कर उसको अपनी उपयुक्त विवेचना कर अपने विचारों को सही तरह से अवगत कराने के लिए संपादक को पत्र लिखना चाहिए ।

अपने आसपास कई तरह की घटनाएं होती हैं उनको भी सही व सरल तरीके से लिखकर हम समाचार बना सकते हैं। सुभाष त्रिवेदी ने समाचार बनाने के कई तरीके बताए ।    

 


इससे पहले संघ के जिला प्रचार प्रमुख मुकेश पोखरना ने कार्यक्रम की भूमिका व नागरिक पत्रकारिता की आवश्यकता के बारे में बताया।कार्यक्रम के अंत में संघ के जिला प्रचारक रघुवीर जी ने प्रचार विभाग के कार्य व उसकी वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आवश्यकता के बारे में बताया। 

प्रचार विभाग की सोशल मीडिया कार्यशाला सम्पन्न




प्रतिभागियों ने सीखा स्वयं का चैनल बनाना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग की सोशल मीडिया कार्यशाला आयोजित



जोधपुर, 02 जुलाई। दूरसंचार के क्षेत्र में हो रहे क्रान्तिकारी बदलाव जनता के लिए नई सौगात लाए है। लोग अब खुद का विडियो चैनल बना पूरी दुनिया को दिखा सकते है। जोधपुर के सक्रिय सोशल मीडिया यूजर्स ने रविवार को विडियो बनाकर स्वयं का चैनल कैसे चलाया जाये, इसकी पूरी प्रक्रिया को विस्तार से जाना। मौका था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जोधपुर महानगर के प्रचार विभाग के तत्वाधान में एक दिवसीय सोशल मीडिया कार्यशाला का। इसका आयोजन कमला नेहरु नगर स्थित आदर्श विद्या मन्दिर के भव्य सभागार में किया गया। इस कार्यशाला में कुल 205 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

इस बारे में जानकारी देते हुए महानगर प्रचार प्रमुख डॉ.अभिनव पुरोहित ने बताया कि प्रचार माध्यमों का सकारात्मक उपयोग हो, इसी ध्येय के साथ यह कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की शुरुआत सरस्वती माँ और भारम माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन से हुई।

प्रान्त सोशल मीडिया प्रमुख डॉ.अनिल गुप्ता ने प्रथम सत्र को सम्बोधित करते हुए फेसबुक के सुरक्षा मानकों और अन्य विशिष्ट सुविधाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. गुप्ता ने कहा कि यूजर्स को फेसबुक से कार्य समाप्त होने के बाद लॉग आउट होना बहुत जरुरी है। साथ ही सेटिंग में जाकर लोकेशन वाले सिक्युरिटी ऑप्शन को क्लिक कर भी अपने अकाउंट की सुरक्षा बढ़ा सकते है।

कार्यशाला का द्वितीय सत्र यू ट्यूब वेब साइट पर था। इसे सम्बोधित करते हुए डॉ.चन्देश शर्मा ने प्रतिभागियों को यू ट्यूब वेब साइट पर अकाउंट खोलने, विडियो अपलोड करने एवं स्वयं का चैनल बनाने की प्रक्रिया समझाई। शर्मा ने विभिन्न एप के माध्यम से विडियो डाउन लोड करने की प्रक्रिया भी बताई।

कार्यशाला का तृतीय और अन्तिम सत्र प्रसिद्ध वेब साइट ट्विटर पर था। इस सत्र को अभिषेक पुरोहित ने सत्र को सम्बोधित करते हुए हैश टैग करना, टैªण्ड करना एवं रिट्विट करने की प्रक्रिया को बताया। पुरोहित ने कहा कि ट्विटर पर कोई प्राईवेसी पॉलिसी नही होती अतः पूर्णतः सोच विचार कर उचित शब्दों के माध्यम से अपनी बात कहनी चाहिये।

कार्यशाला के समापन पर प्रान्त कार्यवाह श्याम मनोहर जी  ने इस प्रकार के आयोजन की सार्थकता बताते हुए प्रतिभागियों से सिखाई गई तकनीको का अभ्यास व निरन्तर प्रयोग करने पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को ध्यान में रखकर कलम का उपयोग करने आव्हान किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से हमें समाज को जोड़ने का कार्य करना है।

कार्यशाला का संचालन महानगर सोशल मीडिया प्रमुख डॉ.शैलेन्द्र शर्मा ने किया। अन्त में विभाग प्रचार प्रमुख दीपक जी कच्छवाह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

गुरुवार, 25 मई 2017

सफल होने के साथ-साथ व्यक्ति का जीवन उद्देश्यपूर्ण भी होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

सफल होने के साथ-साथ व्यक्ति का जीवन उद्देश्यपूर्ण भी होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

 
नई दिल्ली (इंविसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जीवन में सफल होने के साथ-साथ जीवन को उद्देश्यपूर्ण भी होना चाहिए. तभी मनुष्य को प्राप्त विद्या सार्थक होती है. ऐसे उत्कृष्ट कार्य को विद्या भारती पूरी मेहनत के साथ कर रही है. सरसंघचालक मोहन भागवत जी 23 मई को विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से संबंधित समर्थ शिक्षा समिति द्वारा संचालित राव मेहर चंद सरस्वती विद्या मंदिर, भलस्वा के नए भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि विद्याभारती ने अपने हाथ में एक कल्याणकारी, मंगलकारी कार्य लिया है. इसके माध्यम से विद्या भारती एक ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करना चाहती है जो हिन्दुत्व निष्ठ और राष्ट्र प्रेम से ओत-प्रोत हो, अपनी वर्तमानकालीन समस्याओं से सामना करने में सफल होने के लिए सक्षम हो और अपने देश के अभावग्रस्त लोग, साधनहीन लोगों को शोषण और अन्याय से मुक्ति दिलाकर उनका उत्थान करने के लिए सेवारत हों.

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जीवनयापन करना नहीं है. शिक्षा प्राप्त करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि जिस समाज व जिस देश से हम हैं, उसे वापिस देने के लिए हम सक्षम बनें. शिक्षा को सार्थक बनाने के लिए इन भावों को जगाना जरूरी है. विद्या मनुष्य को शिक्षित बनाती है. वह बच्चों के मन में स्वाभिमान को बनाए रखने की क्षमता प्रदान करती है. विद्या केवल विद्यालय में जाकर नहीं सीखते हैं. इसमें अभिवावकों और परिवारों का भी बहुत बड़ा त्याग, तपस्या, और बलिदान सम्मिलित होता है.

विद्या भारती इन सब कार्यों को अच्छे ढंग से करने का प्रयास कर रहा है. विद्या भारती वास्तव में एक परिवार है, जिसमें अभिभावक, आचार्य और विद्यार्थी सभी शामिल हैं. जिस प्रकार की शिक्षा की हमें आवश्यकता है, वह विद्यार्थियों को मिल सके, इस हेतु विद्या भारती के लाखों कार्यकर्ता दिन-रात एक करके समर्पित होकर लगे हुए हैं.

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान से संबंधित समर्थ शिक्षा समिति द्वारा संचालित “राव मेहर चंद सरस्वती विद्या मंदिर, भलस्वा के नए भवन के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा, विद्या भारती के अखिल भारतीय पदाधिकारी डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी जी, दिल्ली प्रांत के संघचालक कुलभूषण आहूजा जी, विद्यालय प्रबंधन के सदस्य एवं शिक्षक उपस्थित थे.

गुरुवार, 18 मई 2017

सार्थक और सकारात्मक पत्रकार थे देव ऋषि नारद - विष्णु प्रसाद चतुर्वेदी

सार्थक और सकारात्मक पत्रकार थे देव ऋषि नारद - विष्णु प्रसाद चतुर्वेदी
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पाली 16 मई 2017.  रोटरी भवन  में विश्व संवाद केंद्र पाली द्वारा देवर्षि नारद जयंती (पत्रकार दिवस) एवं पत्रकार सम्मान समारोह मनाया गया! कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी ने बताया कि देव ऋषि नारद विश्व के प्रथम पत्रकार थे, जिन्होंने सार्थक एवं सकारात्मक पत्रकारिता की लेकिन वर्तमान सिनेमा एवं TV में  नारद मुनि की भूमिका को हास्यास्पद दिखाया जाता है जिससे आमजन में उनके प्रति नकारात्मक छवि बनी हुई है! उन्होंने बताया कि नारद जी को श्राप मिला था कि वह कहीं पर भी टिककर नहीं बैठेंगे उन्होंने बताया कि वर्तमान में भी देव ऋषि नारद की तरह सार्थक पत्रकारिता की आवश्यकता है! 
चतुर्वेदी ने बताया कि पत्रकारिता समाज में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में कार्यरत है, यह वह स्तंभ है जो सही को सही एवं गलत को गलत कहने की हिम्मत रखते हैं, एवं समाज में सामजस्य बनाए रखते हैं! उन्होंने बताया कि वर्तमान पत्रकारों को देश की भावी चुनौतियों को देखते हुए सफल पत्रकारिता की बजाय सार्थक पत्रकारिता करनी चाहिए, जो न केवल समाज के नैतिक चरित्र को बनाए रखें अपितु इन विकट परिस्थितियों में भी हमारी स्वर्णिम एवम  इतिहासिक संस्कृति को जीवित रखें!
इससे पहले कार्यक्रम के अध्यक्ष, विश्व संवाद केंद्र के के प्रांत प्रमुख, प्रफुल्ल जी मेहता ने बताया कि विश्व संवाद केंद्र समाचार संस्था नहीं वरन विचार संस्था है, जोकि सूचनाओं का संकलन व वितरण हेतु कार्यरत है!विश्व संवाद केंद्र राष्ट्रीय विषय व राष्ट्रीय संस्कृति धर्म व समाज संबंधित जानकारियों का संकलन करता है!उन्होंने बताया कि नारद मुनि तीनों लोकों में विचरण करने वाले मानव, दानव व देवताओं के बीच समान रूप से लोकप्रिय और विश्वसनीय व विद्वान, भक्ति सूत्र के रचियता, निष्पक्ष एवम निर्भीक  थे! 

पत्रकार सुभाष जी त्रिवेदी ने भी  अपने विचार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सराहना की एवं बताया कि इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए!

Displaying IMG-20170516-WA0014.jpgकार्यक्रम में पधारे हुए सभी पत्रकारों को उपस्थित अतिथियों द्वारा  दुपट्टा, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया!कार्यक्रम के अंत में   विभाग प्रचार प्रमुख तेज सिंह जी ने आगंतुक पत्रकारों एवं प्रबुद्धजनों का आभार व्यक्त किया!

इस कार्यक्रम में ओम चतुर्वेदी, राजीव दवे,अविनाश केवलिया,हस्त पाल सिंह, राजीव अग्रवाल,धर्मेंद्र वैष्णव,सुरेश हेमनानी,शेखर राठौड़,दिनेश, मुकेश राजा, भारतभूषण जोशी, सुभाष त्रिवेदी एवम तोष चंद्र चौहान आदि पत्रकारों को  सम्मानित किया गया! कार्यक्रम में मुकेश पोखरण, सुरेंद्र चारण, निखिल व्यास,हंसराज शर्मा,मनीष शर्मा, आनंद सिंह, ईश्वर सिंह, अभिषेक  आदि का सहयोग रहा! इस अवसर पर शहर के कई गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे!


बुधवार, 17 मई 2017

संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष का शुभारम्भ * संघ को जानना समझना है तो संघ का प्रत्यक्ष कार्य करना पड़ेगा - दत्तात्रेय होंसबोले

 संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष का शुभारम्भ 
 
नागपुर (विसंकें). रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगवार स्मृति भवन परिसर के महर्षि व्यास सभागृह में तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का सोमवार प्रातः शुभारंभ हुआ. उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने कहा कि संघ से जुड़ने के पश्चात् सभी स्वयंसेवक स्वप्न देखते है कि संघ शिक्षा, तृतीय वर्ष तक पूर्ण की जाए. परन्तु ये सौभाग्य सभी को प्राप्त नहीं होता है. लाखों स्वयंसेवकों में से चुने हुए हजार स्वयंसेवक ही इस साधना के पुजारी बन पाते हैं. यह वर्ग इसलिए भी खास है क्योंकि नागपुर की इसी भूमि से आद्य सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार जी ने संघ कार्य को अवतरित किया और पूज्य गुरु जी की तपस्या यहाँ के कण-कण में व्याप्त है. संघ को यदि जानना है तो संघ के विषय में किताबें पढ़ना, किताबें लिखना, अनुसंधान करना पर्याप्त नहीं है. संघ को जानना-समझना है तो संघ का प्रत्यक्ष कार्य करना पड़ेगा. जिस तरह तैराकी सीखना है तो नदी में कूदना ही पड़ेगा और धारा के विपरीत चलना पड़ेगा, वैसे ही संघ को बाहर रह कर नहीं समझा जा सकता. स्नेह, आत्मीयता, समर्पण, नि:स्वार्थ भाव से बने स्वयंसेवक आज राष्ट्रीय जीवन के केंद्र बिंदु बन गए है.

सह सरकार्यवाह जी ने शिक्षार्थियों को स्वयंसेवकत्व का अर्थ बताते हुए कहा कि समाज की किसी भी आवश्यकता या संकट के समाधान हेतु, वह सज्जन शक्ति जो संगठित होकर, परिचित-अपरिचित को सद्भावपूर्वक, आत्मीयता के विशाल बाहू फैला कर स्वागत करे – स्वयंसेवक की पहचान है. संघ का वर्ग कोई इवेंट मैनेजमेंट नहीं है, इस वर्ग के क्षण-क्षण को, कण-कण को अपने अंतर्मन में समाहित कर स्वयंसेवकत्व की अनुभति करें. ऐसे प्रशिक्षणों से हम शारीरिक के साथ साथ वैचारिक रूप से भी मजबूत होते है. ये राष्ट्र क्या है ? हिन्दू राष्ट्र क्या है ? संघ का कार्य, क्यों, कैसे ? ऐसे अन्यान्य मूल प्रश्नों का निरसन प्रशिक्षण वर्ग के माध्यम से होता है. शरीर तो स्वस्थ है, पर अपने मन को भी स्वस्थ, चुस्त और संवेदनशील बनाने की साधना यह प्रशिक्षण वर्ग है. शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के शुद्धिकरण का माध्यम है यह वर्ग. सम्पूर्ण देश का अनुभव अर्थात अगले 25 दिनों तक आप इस परिसर में भारत भ्रमण करेंगे.

अलग भाषा, अलग पहनावा, अलग खानपान, पर फिर भी एक हो कर, राष्ट्र के लिए समर्पित हो कर, जब आप यह प्रशिक्षण पूर्ण करेंगे तो आप स्वत: ही “अखिल भारतीय व्यक्तित्व “ बन जाते हैं. संघ में कई लोग, संघ के रहस्य को जानने के लिए आते हैं. प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा जी ने शाखा देखने की इच्छा व्यक्त की, जिससे स्वयंसेवक का निर्माण होता है.

परिवर्तनशील भारत में आज भी जीवन मूल्यों को आखिर कैसे संरक्षित रखा जा सकता है, इस पर कई देश आश्चर्यचकित हैं, कुछ शोध कर रहे हैं. सम्पूर्ण विश्व की नजर संघ पर है. ये एक राष्ट्रीय अभियान है और इसी कड़ी में आप इस वर्ग का हिस्सा बन कर अलग-अलग स्तर पर अपने व्यक्तित्व का निर्माण करेंगे. तृतीय वर्ष के प्रशिक्षण वर्ग का यह कालखंड आप शिक्षार्थियों के जीवन का स्वर्णिम कालखंड बने और यह साधना कर के आप राष्ट्र हित में उपयोगी सिद्ध हों और अपने जीवन में आप सफलता संतुष्टि और सार्थकता प्राप्त करते रहें.

सर्वाधिकारी पृथ्वीराज सिंह जी ने कहा कि हम राष्ट्र आराधना करने एकत्रित आए हैं. प्रशिक्षण से निरंतरता बनी रहती है. यह स्थली तपस्या की है, साधना की है और इसलिए यहाँ आकर हमारा दायित्व और जिम्मेदारी ओर भी बढ़ जाती है.
पालक अधिकारी के रूप में अनिल जी ओक का मार्गदर्शन हुआ. उन्होंने कहा कि मनुष्य रूप में अपना जन्म हुआ, इस श्रेष्ठ कार्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा तथा प्रेरणा हेतु महापुरुषों का सान्निध्य, ये सभी हम पर भगवान का अनुग्रह है, ईश्वरीय अनुकम्पा है. इसीलिए संघ कार्य ईश्वरीय कार्य है, ऐसा सुनने को मिलता है. आज सम्पूर्ण विश्व में महाभारत जैसी स्थिति व्याप्त है. सभी विनाश करने की बात करते हैं, कोई भी बसाने की बात नहीं करता है, इसलिए आज शील के साथ-साथ शक्ति की भी आवश्यकता है. विनाश की इस घड़ी में सभी देश भारत की ओर आशा से देख रहे हैं.

अगले 25 दिन के प्रशिक्षण में क्या करना और क्या नहीं करना है, मैं क्या हूँ और मुझे क्या बनना है ? इन दोनों के बीच के अंतर का कम होना ही विकास होगा और यही प्रशिक्षण का उद्देश्य है. ज्ञान, कर्म और श्रद्धा का समन्वय बनाइए, किसी एक के बिना बाकि दोनों अधूरे रहते हैं. शारीरिक, बौद्धिक, खेल, चर्चा, चिंतन के माध्यम से प्रशिक्षण वर्ग को पूरा करें. 25 दिन की इस संघ गंगा में अधिकतम से अधिकतम अपना घड़ा भरें.



उद्घाटन कार्यक्रम का प्रास्ताविक एवं अधिकारियोंका का परिचय मा. भागय्या जी (अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह ) ने किया ! श्री स्वांत रंजनजी (अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख), श्री मुकुंदजी ( अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख ) श्री सुनीलजी कुलकर्णी (अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख ), श्री. जगदीश प्रसाद जी (अखिल भारतीय सह शारीरिक प्रमुख) श्री मंगेश जी भेंडे ( अखिल भारतीय व्यवस्था प्रमुख) श्री पराग जी अभ्यंकर (अखिल भारतीय सेवा प्रमुख) श्री सुब्रमण्यम जी ( अखिल भारतीय कुटुंब प्रबोधन प्रमुख) प्रमुख रूपसे उपस्थित थे

इस वर्ग के सर्वाधिकारी मा. पृथ्वी राज सिंह जी, पालक अधिकारी मा. अनिल जी ओक, वर्ग कार्यवाह  मा. रमेश काचम जी , मुख्य शिक्षक गंगा विष्णु जी ,सह मुख्यशिक्षक श्री अखिलेश जी , बौद्धिक प्रमुख रविन्द्र किरकोले जी ,सह बौद्धिक प्रमुख सुनील देव जी , सेवा प्रमुख  नवल किशोर जी , व्यवस्था प्रमुख दिलीप हाडगे जी , है ! 8 जून २०१७ को वर्ग समाप्त होगा.

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित