गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

नेपाल के भक्तपुर गाँव में २०,००० लोगो को सहायता

 नेपाल के भक्तपुर गाँव में २०,००० लोगो को सहायता दी गई।  उसी गाँव के रहवासियों के चित्र जो हिन्दू स्वयंसेवक संघ के कैंप से राहत  सामग्री ले रहे है।

राहत  सामग्री के संग स्वयंसेवक

 नेपाल के भक्तपुर गाँव में २०,००० लोगो को सहायता दी गई।  उसी गाँव के रहवासियों के चित्र जो हिन्दू स्वयंसेवक संघ के कैंप से राहत  सामग्री ले रहे है।

साभार: राहुल कँवल टवीट  से @rahulkanwal

नेपाल में स्वयंसेवक संघ - एक नज़र चित्रों की जुबानी

नेपाल में स्वयंसेवक संघ - एक नज़र चित्रों  की जुबानी
नेपाल में भूकंप पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित करते संघ के सह-सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबले जी व् अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री श्री सुनील आंबेकर जी
दत्ता  जी स्वयं राहत  कार्य की हर गतिविधियों पर नज़र रखे हे

राहत कार्य की रचना

हिन्दू स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्त्ता नियंत्रण कक्ष में

पाकिस्तान ने नेपाल भूकम्प पीडितो के लिए भेजा बीफ (गौमांस )

पाकिस्तान ने नेपाल भूकम्प पीडितो के लिए भेजा बीफ (गौमांस )

Pakistan serves beef to Nepal earthquake survivors

Astha Saxena   |   Mail Today  |   New Delhi, April 30, 2015 | UPDATED 09:24 IST
Food packets
आलू भुजिया बीफ मसाला लिखा पैकेट
These packets carrying potato bhujia & 'beef masala' were spotted in relief material sent from Pak to Nepal.After experiencing major devastation and loss of lives in the April 25 earthquake, Nepal is left with an unsavoury taste in the mouth when it received packets of 'beef masala' as part of the relief package from Pakistan.
Since the majority-Hindu country treats cows as sacred and there is a blanket ban on slaughtering the animal, the development has the potential of triggering diplomatic acrimony between the South Asian Association for Regional Cooperation (SAARC) member countries.
Indian doctors at Kathmandu's Bir Hospital told Mail Today that packets of 'beef masala' were sent by Pakistan on Tuesday as part of relief aid to the temblor survivors. These doctors - drawn from Ram Manohar Lohia (RML) Hospital, Safdarjung Hospital and All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) - are members of a 34-member medical team sent to Nepal for treating the survivors.
"When we reached the airport to collect the food items from Pakistan, we found packets of ready-to-eat meals, including packets of 'beef masala'. There were other food items too," Dr Balwinder Singh told Mail Today.
Perplexed, the doctors chose to have food from a hotel instead. "We did not touch the Pakistani aid," Dr Singh said.
"Most of the local people are not aware of the contents. When they understand, they avoid it," said another doctor on the condition of anonymity. He added: "Pakistan has hurt Nepal's religious sentiments by supplying the masala. Shockingly, it did not care about the sensitivity of the matter."
Exclusive photographs of the 'beef masala' packets supplied to Nepal are with Mail Today.
These pictures clearly show that the place of origin of these packets was Nowshera Cantt in Pakistan. These packets also prominently mention that these are not for sale and the contents include 'potato bhujia' and 'beef masala' (see photograph, right).
A top Nepal government official said: "The matter has been conveyed to Prime Minister Sushil Koirala and the intelligence chief. We are also starting an internal inquiry to verify the facts. If the report is correct, we will raise the matter at the diplomatic level with Pakistan. India, being our key partner, will also be informed of the developments."
Tasneem Aslam, spokesperson for Pakistan's ministry of foreign affairs, told Mail Today: "I am not aware of the issue... I am not responsible for the dispatch. The relief aid is sent by the National Disaster Management Authority."
A press note uploaded on the website of National Disaster Management Authority (NDMA), Pakistan (http://www.ndma.gov.pk/new/), states: "(The) National Disaster Management Authority has dispatched the second of two sorties of C-130 aircrafts on April 28 in collaboration with Pakistan Army, Ministry of Foreign Affairs and Pakistan Air Force. The relief goods include 250 tents, 200 food packs (2.6 tonne), 1,000 Meals Ready to Eat (MREs), 1,000 blankets and 33 cartons of medicines. These relief goods have been provided from NDMA stocks...."
Pakistani soldiers load relief supplies for Nepal.Pakistani soldiers load relief supplies for Nepal.
Despite repeated attempts, the officials of the Pakistan NDMA could not be contacted.
The food items have been manufactured by PANA Force Foods. The consignment was supplied after receiving orders from Pakistan's NDMA.
"PANA Force food processing centre aims at providing quality goods at affordable prices. Currently, the company is supplying two brands of products to Pakistan Army commonly known as Meal Ready to Eat (MRE) and Emergency Pack Ration (EP Ration or high-energy biscuits) whereas a plant for the production of dehydrated vegetables and fruits is under construction," the official website of PANA Force Foods mentions.
The website also states that the processing centre provides food to civil population during natural calamities, like earthquakes and floods.
According to Hindu belief, eating beef is a religious offence since cow is a sacred animal and treated on a par with one's mother.
In Nepal - for long the world's only Hindu state - the first royal order officially prohibiting cow slaughter stated that the punishments for the crime were death and confiscation of all property of the offender.
The first Civil Code of Nepal, the Muluki Ain of 1854, stated: "This kingdom is the only kingdom in the world where cows, women, and Brahmins may not be killed." It trumpeted Nepal as the 'purest Hindu kingdom' and simultaneously signaled to Nepalese citizens that Hindu religious creeds would be the law of the land.
But an amendment in 1990 to the Civil Code made cow slaughter punishable by 12 years in prison.

स्त्रोत :: http://indiatoday.intoday.in/story/nepal-earthquake-pakistan-relief-aid-beef-masala-pana-force-foods-bir-hospital/1/432868.html

विदेशी चंदे पर चलने वाले एनजीओ पर सरकार की कड़ी कार्रवाई से देशविरोधी गतिविधियों पर विराम लगेगी?


विदेशी चंदे पर चलने वाले एनजीओ पर सरकार की कड़ी कार्रवाई से देशविरोधी गतिविधियों पर विराम लगेगी?

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बुधवार, 29 अप्रैल 2015

आरोग्य भारती के चिकित्सकों की टीम नेपाल रवाना

आरोग्य भारती के चिकित्सकों की टीम नेपाल रवाना

आरोग्य भारती का दल नेपाल रवाना होने से पूर्व
आरोग्य भारती का दल नेपाल रवाना होने से पूर्व

फरीदाबाद. आत्मीय पड़ोसी देश नेपाल में आये भीषण भूकम्प से पीड़ित बंधुओं की सहायतार्थ 28 अप्रैल को फरीदाबाद से आरोग्य भारती, हरियाणा के प्रमुख डॉ राहुल जिंदल के नेतृत्व में 14 चिकित्सकों व सहायकों ने  कुछ आवश्यक दवाइयों  के साथ शाम 6 बजे  नेपाल के लिए प्रस्थान किया. दवाइयों  की व्यवस्था आरोग्य भारती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, हरियाणा स्टेट फार्मेसी कॉउंसिल, रेड क्रॉस सोसाइटी व सेवा भारती ने की है.  नेपाल जाने वाले सभी लोग फरीदाबाद में सेक्टर 19 स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय में एकत्र हुए.

इस अवसर पर रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव डीआर शर्मा, सह सचिव बीपी कथूरिया, आरोग्य भारती हरियाणा के संयोजक भीम सैन, संघ के प्रान्त कार्यवाह देव प्रसाद भारद्वाज, सह प्रान्त प्रचारक विजय कुमार, सह महानगर संघचालक डॉ अरविन्द सूद , विभाग कार्यवाह गंगाशंकर मिश्र, सहित अन्य नेपाल जाने वाले चिकित्सकों, स्वयंसेवकों को विदा करने के लिए उपस्थित थे.

देव प्रसाद भारद्वाज ने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है. संकट के समय में पीड़ितों को राहत पहुंचाना ईश्वरीय कार्य है और संघ व इसके आनुषांगिक संगठनों के स्वयंसेवक सदैव ऐसे समय में आगे रहे हैं. नेपाल के साथ हमारे सदा से आत्मीय सम्बन्ध रहे हैं, और संकट की घड़ी में हम कंधे से कन्धा मिला कर नेपाल के साथ खड़े रहेंगे.

मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

नेपाल के बन्धुओं की सहायता भारतवासियों का स्वाभाविक कर्तव्य एवं दायित्व - भय्याजी जोशी

नेपाल के बन्धुओं की सहायता  भारतवासियों का स्वाभाविक कर्तव्य एवं दायित्व - भय्याजी जोशी
दिल्ली २८ अप्रैल २०१५ ।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश  जोशी भय्याजी जोशी  ने आव्हान किया है कि हम सभी भारतवासियों का यह एक स्वाभाविक कर्तव्य एवं दायित्व बन जाता है कि अपने निकटतम पड़ोसी एवं चिरआत्मीय नेपाल के बन्धुओं की सहायता हेतु शीघ्रातिशीघ्र खड़े हों।

नेपाल तथा भारत के कुछ भागों में आये विनाशकारी भूकम्प के कारण सारे विश्व में एक शोक की लहर दौड़ गई है। प्रकृति की इस विनाशलीला से सभी स्तब्ध एवं दुःखी हैं। संपूर्ण नेपाल में भारी जनहानि और सम्पत्ति का जो व्यापक नुकसान हुआ है वह अकल्पनीय है। नेपाल में हजारों लोगों की मृत्यु हो चुकी है, हजारों घायल हैं तथा लाखों बेघरबार हुए हैं। भारत में भी बिहार, प. बंगाल, उत्तर प्रदेश, सिक्किम आदि स्थानों पर भी व्यापक जनधन हानि के समाचार मिले हैं। 

 भय्या जी जोशी ने कहा कि हम सभी के लिए कुछ सन्तोष की बात है कि भारत सरकार ने नेपाल पर आई इस विपत्ति को अपनी विपत्ति मानकर कुछ घण्टों के अन्दर ही सहायता सामग्री से भरे भारतीय विमानों को नेपाल के अन्दर पहुँचा दिया और सभी प्रकार की आवश्यक सहायता भारत सरकार वहाँ पहुँचाने का प्रयत्न भी निरन्तर कर रही है।

किन्तु, भूकम्प की विनाशलीला भी बहुत व्यापक है अतः हम सभी भारतवासियों का कर्तव्य बन जाता है कि संकट की इस घड़ी में एकजुट होकर नेपाल की सभी दृष्टि से सहायता हेतु आगे आएँ तथा भूकम्प प्रभावित भारतीय क्षेत्रों को भी तुरन्त सहायता पहुँचावें।

सरकार्यवाह जी ने बताया कि ‘राष्ट्रीय सेवा भारती दिल्ली’ तथा ‘सेवा इण्टरनेशनल’ के माध्यम से यह सामग्री और सहायता (धनराशि) नेपाल भेजी जाएगी।

भैया जी जोशी ने विश्वास व्यक्त किया  कि सभी संवेदनशील देशवासी इस कार्य में तत्परता से जुट जाएँगे और स्थान-स्थान पर सभी संगठनों के कार्यकर्ता भी इसमें यथा सामथ्र्य सहयोग-सहायता अवश्य करेंगे।

लालसागर परियोजना का शिलान्यास ३० अप्रैल को करेंगे मा. सुहासराव हिरेमठ

लालसागर परियोजना का शिलान्यास ३० अप्रैल को करेंगे मा. सुहासराव हिरेमठ 

जोधपुर २७ अप्रैल १५ ।   प्रबंध समिति आदर्श विद्या मंदिर, जोधपुर के अंतर्गत लालसागर परियोजना का शुभारम्भ  कार्यक्रम ३० अप्रैल २०१५ को आयोजित होगा।  इस अवसर पर परियोजना का शिलान्यास राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रशिक्षण प्रमुख माननीय सुहास राव जी हिरेमठ करेंगे।  इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गजेन्द्र सिंह खींवसर, मंत्री , राजस्थान सरकार एवं अध्यक्षता उधोगपति सुरेश जी गांधी करेंगे।  शुभारम्भ कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि महाधिवक्ता श्रीमान नरपत मल लोढ़ा  एवं समाजसेवी अप्रवासी भारतीय श्रीमान श्याम  कुम्भट  होंगे. 

कार्यक्रम हनुवंत आदर्श विध्यामंदिर, लाल सागर में ३० अप्रैल २०१५ दोपहर १२. १५ पर आयोजित होगा।  

आदर्श विध्यामंदिर प्रबंध समिति के सचिव संग्राम सिंह काला  ने बताया कि इस परियोजना के संरक्षक  माधवदास मोदी , अध्यक्ष रतन लाल डागा  सचिव दुर्ग सिंह राजपुरोहित एवं कोषाध्यक्ष प्रकाश जीरावला होंगे।  इस परियोजना के सदस्य सर्वश्री महेंद्र दवे , विनोद जौहरी , सत्यनारायण धूत, अंशु सहगल, अतुल भंसाली, सोहन सिंह गोदारा , श्याम बाहेती, प्रतीक नाहर, दिनेश जोशी, ओम प्रकाश मूंदड़ा, प्रेम सिंह देवड़ा , मनोहर पुंगलिया , सुभाष गहलोत , महेश शर्मा एवं संग्राम सिंह काला होंगे. 

परियोजना के अध्यक्ष रतन लाल डागा ने बताया कि "लालसागर परियोजना "को राष्ट्रीय महत्व का शिक्ष का एक अभिनव  केंद्र बनाने की हैं।   इस परियोजना की परिकल्पना आगामी ५० वर्षों  की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बहुआयामी , रोजगारोन्मुखी शैक्षिक संस्थान के रूप में विकसित  करने की हैं.

इसमें  कौशल विकास केंद्र , सेना अधिकारी बनाने का प्रशिक्षण केंद्र , राष्ट्रीय स्तर का खेल प्रशिक्षण केंद्र तथा विध्या भर्ती के आधारभूत विषयो का प्रशिक्षण केंद्र व् अनुसन्धान केंद्र विकसित किये जायेंगे. 

लालसागर परियोजना
राष्ट्रीय पुनरूत्थान का अभिनव शिक्षा केन्द्र
वर्तमान स्वरूप
भूमि एवं भवन- वर्तमान में  विद्यामन्दिर के पास 42 बीघा जमीन एवं बड़ा पहाड़ी क्षेत्र है। जिसमें 7 भवन बने हुए है। उनमें 39 बडे़ कक्ष , 13 छोटे कक्ष , 4 हाॅल  एवं एक विशाल सभागार बना हुआ है।

जलाशय- परिसर में एक बड़ा 12 बीघा जमीन का जलाशय है, जिसे लालसागर के नाम से जाना जाता है। यह जलाशय वर्ष भर भरा रहता है, वर्षा का पानी आने के लिए तीन ओर पहाडि़याँ हैं।

विद्यामन्दिर - वर्तमान विद्यामन्दिर तीन ईकाइयों में चलता है।
1 बालकों का उच्च माध्यमिक विद्यालय
2 बालिकाओं के लिए माध्यमिक स्तर का विद्यालय
3 छोटे भैया/बहिनों हेतु प्राथमिक विद्यालय जिसमें  764 भैया/बहिन अध्ययनरत हैं।

छात्रावास - वर्तमान में 68 भैयाओं का छात्रावास चलता है, जिसमें 35 गाँवों के भैया अध्ययनरत हैं।

वैशिष्ट्यः- हमारे विद्यामन्दिर की भौगोलिक एवं शैक्षणिक विशेषताएँ अधोलिखित है-

1 भौगोलिक वैशिष्ट्यः-
- विद्यामन्दिर की अपनी पर्याप्त भूमि।
- जलाशय के कारण पर्याप्त पानी की उपलब्धता।
- प्राकृतिक सौदन्र्य से परिपूर्ण परिसर।
- रेल्वे स्टेशन से मात्र 7 किलोमीटर एवं बस स्टेशन से मात्र 5 कि.मी. की दूरी।

2 शैक्षणिक वैशिष्ट्यः-

1 देश  का सबसे बड़ा गैरसरकारी शिक्षा  संस्थान ‘विद्याभारती’ से सम्बद्ध।
2 शिक्षा एवं संस्कार द्वारा व्यक्ति निर्माण का केन्द्र।
3 पाँच आधारभूत विषय- शारीरिक, येाग, संगीत संस्कृत, नैतिक एवं आध्यत्मिक शिक्षा
  के माध्यम से सर्वांगीण विकास।
4 संस्कारक्षम वातावरण  में प्रतिदिन प्रभावी वन्दना।
5 प्रतिभाओं के विकास के लिए-राष्ट्रीय स्तर तक शारीरिक प्रतियोगिताएँ, बौद्धिक
  प्रतियोगिताएँ, विज्ञान मेला, प्रश्न मंच एवं पत्र-वाचन आदि के अवसर उपलब्ध करवाना।
6 कम्प्यूटर शिक्षा की उतम व्यवस्था।
7 विद्यार्थियों में सामाजिकता एवं देश  प्रेम के संस्कार डालने हेतु प्रतिवर्ष स्वदेशी  सप्ताह ,
संस्कृति ज्ञान परीक्षा, उपेक्षित जन शिक्षा एवं कुष्ठ रोगियों की सहायतार्थ निधि संग्रह।
8 घर की विद्यालय की संकल्पना साकार करने हेतु सतत गृह-सम्पर्क, मातृ सम्मेलन एवं अभिभावक सम्मेलनों का अयोजन।
भावी स्वरूप
राष्ट्र आराधना केन्द्रः- 
पुण्यभूमि भारत
विश्व गुरु भारत
वैभवशाली भारत
एवं भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का दर्शन  करवाने वाला आधुनिक तकनीक से निर्मित आस्था का एक दर्शनीय  केन्द्र, जिसे देखने के लिए देश -विदेश  से पर्यटक  आयेंगे-

प्रतिभा विकास केन्द्र:- (Center of Excellence)
प्रशासनिक, प्रौद्योगिक, सूचना तकनीक आदि के क्षेत्र की विशेष प्रतिभाओं का विकास करने वाला केन्द्र खड़ा किया जायेगा।

राष्ट्रीय स्तर का खेल केन्द्र:- 
एथेलेटिकस, कुश्ती, जूड़ो,कबड्डी, खो-खो, तैराकी आदि भारतीय खेलों के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण एवं खिलाड़ी तैयार किये जायेंगे।

कौशल विकास केन्द्र:- (Skill Development Centre)
वर्तमान भारत में बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है, जो देश  के विकास में बाधक है। अतः इस केन्द्र में केवल किताबी पढ़ाई नहीं अपितु हाथ का हूनर सिखाकर, विभिन्न क्षेत्रों में ैापससमक व्यक्ति तैयार करना जो भारत के आर्थिक विकास में योगदान दे सके।

कला विकास केन्द्र:-
जीवन में सृजनात्मकता का अत्यन्त ही महत्व है। भारत में 64 कलाएँ एवं 32 विद्याएँ विकसित हुई थी। उनमें से संगीत,नृत्य ,नाटक, चित्रकला, मूर्तिकला व वास्तुकला आदि प्रमुख कलाओं की शिक्षा का केन्द्र विकसित किया जायेगा।

व्यावसायिक शिक्षा का केन्द्र:- 
आई.टी.आई व पोलिटेक्निक काॅलेज के माध्यम से स्थानीय युवाओं को तकनीक शिक्षा दी जायेगी । जिससे वे स्वयं का व्यवसाय कर स्वावलम्बी बन सके।

अनुसंधान केन्द्र:-
उपर्युक्त सभी केन्द्रों के विकास के लिए भारतीय चिन्तन के आधार पर अनुसंधान कार्यो का आधुनिक केन्द्र खड़ा किया जायेगा, जो राष्ट्र की इस भावी पाढ़ी के निर्माण हेतु सतत अनुसन्धानात्मक मार्गदर्शन उपलब्ध करवायेगा।

आचार्य प्रशिक्षण केन्द्र:- 
विद्याभारती के पाँचों आधारभूत विषय, शिक्षण के विषय एवं विभिन्न प्रकल्पों के लिए योग्य आचार्यों को प्रशिक्षित करने हेतु आधुनिक संसाधनों से युक्त आचार्य प्रशिक्षण केन्द्र खड़ा किया जायेगा।

-मार्गदर्शन -
लालसागर का यह केन्द्र शिक्षा-संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान एवं कला-कौशल  की शिक्षा एवं प्रशिक्षण के माध्यम से राष्ट्र पुनरूत्थान का एक अभिनव केन्द्र बने इस दृष्टि से हमने भावी स्वरूप की कुछ कल्पना की है। हम चाहते हैं कि यह परियोजना सभी दृष्टि से परिपूर्ण हों,

भारतीय शिक्षा की संकल्पना एवं शिक्षकों की भूमिका पर व्याख्यान 3 मई को

भारतीय शिक्षा की संकल्पना एवं शिक्षकों की भूमिका पर व्याख्यान  3 मई को

जोधपुर. मरुविचार मंच और विवि एवं महाविद्यालय मंच के संयुक्त तत्वावधान में "भारतीय शिक्षा की संकल्पना एवं शिक्षकों की भूमिका' विषय पर व्याख्यान  रविवार 3 मई को लाचू कॉलेज में आयोजित होगा। पुररूत्थान विद्यापीठ, अहमदाबाद की संयोजक मा. इन्दुमति काटदरे कार्यक्रम की मुख्य वक्ता होगी।

 माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर के अध्यक्ष प्रो. बीएल चौधरी मुख्य अतिथि होंगे और अध्यक्षता जेएनवीयू के कुलपति प्रो. कैलाश सोढ़ानी करेंगे। मरू विचार मंच के महानगर संयोजक डाॅ. तेजेंद्र वल्लभ व्यास और जोधपुर अध्यक्ष प्रो. ललित गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान के बाद जिज्ञासा एवं समाधान सत्र भी होगा।

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

नेपाल भूकंप त्रासदी में संघ करेगा राहत कार्य राष्ट्रीय डॉक्टर संघटन (NMO) के ५० डॉक्टर चिकित्सा सुविधाये देने के किये नेपाल जायेंगे

नेपाल भूकंप त्रासदी में संघ करेगा राहत  कार्य 
राष्ट्रीय डॉक्टर संघटन (NMO)  के ५० डॉक्टर चिकित्सा सुविधाये देने के लिये नेपाल जायेंगे

राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होस्बोले नेपाल पहुंच चुके है. दत्तात्रेय जी ने भूकंप  प्रभावित  क्षेत्रो का दौरा किया और तत्पश्चात बचाव और राहत  कार्यो के बारे में चर्चा कर रहे है.

संघ द्वारा प्रेरित राष्ट्रीय डॉक्टर संघटन (NMO)  के ५० डॉक्टर चिकित्सा सुविधाये देने के किये कल नेपाल जायेंगे।

राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक संघ नेपाल के हिन्दू स्वंयसेवक संघ के साथ मिल कर  पूरी रचना के संग नेपाल सरकार  से बात कर राहत कार्य करने को तत्पर हे।

नेपाल में बचाव एवं राहत अभियान में शामिल होगा संघ

नेपाल में बचाव एवं राहत अभियान में शामिल होगा संघ

नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भूकंप प्रभावित नेपाल में बचाव एवं राहत अभियान में मदद करने की तैयारी कर ली है तथा उसके नेता समन्वय योजना बनाने के लिए इस हिमालयी देश पहुंच रहे हैं।

आरएसएस ने रविवार को कहा कि नेपाल सरकार के साथ मशविरा करके एक उचित योजना तैयार होने के बाद उसके स्वयंसेवक बचाव प्रयासों में शामिल होंगे।

संघ के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले आरएसएस के नेपाल समकक्ष हिंदू स्वंयसेवक संघ के साथ बचाव योजना के समन्वय के लिए आज रात नेपाल पहुंचे।

आरएसएस के संचार विभाग के प्रमुख मनमोहन वैद्य ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘आरएसएस संयुक्त महासचिव नेपाल पहुंच गए हैं। वह क्षति के पैमाने और राहत एवं बचाव मांग का आकलन करेंगे जिसके बाद और स्वयंसेवक नेपाल पहुंचेंगे।’ आरएसएस ने कहा कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय में एक उचित योजना तैयार होने के बाद भारत से स्वयंसेवक एचएसएस नेपाल के साथ हाथ मिलाकर काम करने को तैयार हैं।

वैद्य ने कहा कि आरएसएस मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है।


शनिवार, 25 अप्रैल 2015

सभी अलगाववादियों को पाकिस्तान भेज देना चाहिये – इंद्रेश कुमार जी

सभी अलगाववादियों को पाकिस्तान भेज देना चाहिये – इंद्रेश कुमार जी

जम्मू, अप्रैल 24 : अलगाववादियों द्वारा पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने की कड़ी निंदा करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने कहा कि अलगाववादियों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगा रहे हैं, उन्हें भारत की सरजमीं पर रहने की इजाजत भारत सरकार ने नहीं देनी चाहिए।        
इंद्रेश कुमार मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के संरक्षक भी हैं। इन्होंने एक सेमिनार में 'देश से पहले की चुनौतियां और भारतीय मुसलमानों की भूमिका' पर बोलते हुए ये बातें कहीं। इस सेमिनार का आयोजन एमआरएम की जम्मू-कश्मीर ईकाई ने किया था। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सभापति कविंदर गुप्ता इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे।

इन्द्रेश कुमार ने कहा कि भारत सरकार ने सभी कश्मीरी अलगाववादियों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए। इसका परिणाम कश्मीरी राष्ट्रवादी लोगों के लिए शांति और समृद्धि भरा होगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार और जनता की सदभावना है कि पाकिस्तान के समर्थन में स्लोगन लहराने के बावजूद यहां रहने दिया जा रहा है लेकिन अब बर्दाश्त करने की सीमा खत्म हो गई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को सलाह दी कि वह जनादेश और भाजपा के समर्थन का सम्मान करते हुए विकास पर ध्यान दें। कुमार ने कहा कि राज्य सरकार को प्रदेश के सभी क्षेत्रों में विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। आजादी के बाद देश में हुए सांप्रदायिक दंगों पर चिंता जताते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि इससे आम आदमी के जीवन और जानमाल को भारी नुकसान पहुंचता है।

इंद्रेश कुमार ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की कि वे अपना शोषण मौकापरस्त समूह हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से न होने दें। उन्होंने कहा कि ये लोग लोगों के जीवन से शांति और सुख को छीनकर उन्हें भड़काने का काम करते हैं। ये मौकापरस्त समूह जम्मू-कश्मीर में शांति प्रक्रिया, संपन्नता, विकास और शिक्षा के खिलाफ काम करते हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक हाजी मोहम्मद अफजल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में केवल मुस्लिम मुख्यमंत्री बनें हैं, लेकिन सभी ने निजी फायदे के लिए काम किया।

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015

संघ बनाएगा 120 कामधेनु नगर, खोलेगा गोकुल गुरुकुल

संघ बनाएगा 120 कामधेनु नगर, खोलेगा गोकुल गुरुकुल 

संघ बनाएगा 120 कामधेनु नगर, खोलेगा गोकुल गुरुकुल 
  वसुधा वेणुगोपाल । नई दिल्ली

आरएसएस अगले कुछ महीनों में देशभर में 120 कामधेनु नगर बनाना चाहता है। संघ का मानना है कि इससे हिंदू परंपरा में पवित्र माने जाने वाले पशुओं का सम्मान होगा और उनके साथ लोगों का रिश्ता मजबूत होगा । संघ को उम्मीद है कि इससे अपराध में कमी आएगी और अपराधियों को सुधारा जा सकेगा। कामधेनु नगर दरअसल गोशालाएं होंगी, जिन्हें रेजिडेंशल कॉलोनियों के पास बनाया जाएगा।

संघ से जुड़े अखिल भारतीय गो सेवा के अध्यक्ष शंकर लाल ने कहा, 'गायों की रक्षा तभी की जा सकती है, जब वे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन जाएं।' उन्होंने कहा, 'हमारी बातचीत रेजिडेंशल सोसायटीज से हो रही है, जो अपनी जमीन गोशालाओं के लिए देने को तैयार हैं। इन गोशालाओं से कॉलोनियों को दूध, दवाएं और गोबर गैस मिलेगी। बदले में कॉलोनियां इन गोशालाओं की देखभाल में मदद करेंगी।'

संघ ने वेस्ट बंगाल, राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में 100 से अधिक स्थान चिह्नित किए हैं। लाल ने कहा, 'इन गोशालाओं में विशुद्ध भारतीय नस्ल की गायें रखी जाएंगी।' उन्होंने कहा, 'अपराध मुक्त भारत के लिए जरूरी है कि हमारे बच्चे भारतीय गायों का ही दूध पियें क्योंकि इससे वे सात्विक बनेंगे। जर्सी गायों और भैंस का दूध पीने से दिमाग में बुरे विचार आते हैं और लोग अपराधी बन जाते हैं।'

संघ की इस साल बड़े आवासीय स्कूलों में 80 गोकुल गुरुकुल खोलने की योजना भी है। लाल ने कहा, 'बच्चे अगर पशुओं के साथ भी रहें तो इसमें बुराई क्या है। बानकेड़ी और ग्वालियर में हमारे ऐसे स्कूल पहले से हैं।'

यह सब गायों की रक्षा से जुड़े संघ के 18 सूत्री अजेंडा का हिस्सा है। इसके तहत गोधन पर आधारित खेती को बढ़ावा देने, जेलों में गोशालाएं बनाने, स्कूली बच्चों को स्कॉलरशिप देने के लिए गायों के बारे में परीक्षा कराने, गो विज्ञान के अध्ययन के लिए एक विश्वविद्यालय खोलने, हर राज्य में एक गाय अभयारण्य खोलने और मंदिरों में हर सप्ताह गो कथा कराने की बातें हैं।

संघ के प्रचारक अभिनव शर्मा ने कहा कि राजस्थान में हाल में स्कूली बच्चों के लिए गो ज्ञान परीक्षा हुई थी और हम ऐसा दूसरे राज्यों में भी करना चाहते हैं। जेलों में गोशालाओं के बारे में लाल ने कहा, 'गायों की सेवा करने से कैदियों के व्यवहार में बदलाव आएगा। मध्य प्रदेश में इसमें सफलता मिली है।'

संघ ने फिनायल, ब्यूटी प्रॉडक्ट्स, मच्छर भगाने वाले उत्पादों सहित 104 चीजों की लिस्ट बनाई है, जिसे उससे जुड़े तमाम एनजीओ ने तैयार किया है। संघ की योजना ऐसा ट्रैक्टर बनाने की भी है, जिसे बैलों से खींचा जा सकेगा। इस तरह किसानों को पशु आधारित खेती की व्यवस्था की ओर लौटाया जा सकेगा। 
साभार: http://navbharattimes.indiatimes.com/

उत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश है या पाकिस्तान ?'

उत्तरप्रदेश में जब से समाजवादी पार्टी सरकार में आई है, वहां हिन्दू जनमानस के समक्ष चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। हिन्दुओं के लिए अपनी बेटी, अपना धर्म और अपना घर तक बचाना मुश्किल हो रहा है। हिन्दुओं के साथ हो रहे दोयम दर्जे के व्यवहार को देखकर कभी-कभी भ्रम होता है कि उत्तरप्रदेश, उत्तरप्रदेश है या पाकिस्तान। 
- लोकेन्द्र सिंह

है! आज के समय में हिन्दुस्थान में हिन्दुओं को अपने घर बचाने के लिए धर्म बदलने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इतिहास की किताबों में पढ़ते हैं कि  मुगलों के अत्याचार से बचने के लिए हिन्दुओं ने मजबूरी में इस्लाम स्वीकार किया। जरूर किया होगा। गर्दन पर तलवार रखी हो और पूछा जा रहा हो-
'जान बचानी है या धर्म? 'तब विकल्प ही कितने बचते हैं आदमी के पास। कुछ ने मौत स्वीकारी तो बहुतों ने मजबूरी में इस्लाम। लेकिन, अब न तो मुगलिया शासन है और न उनकी तलवार का आतंक। फिर कौन है? क्या परिस्थितियां हैं? क्या संकट है कि अपना घर बचाने के लिए हिन्दू धर्मांतरण को मजबूर हैं।
उत्तरप्रदेश में जब से समाजवादी पार्टी सरकार में आई है, वहां हिन्दू जनमानस के समक्ष चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। हिन्दुओं के लिए अपनी बेटी, अपना धर्म और अपना घर तक बचाना मुश्किल हो रहा है। हिन्दुओं के साथ हो रहे दोयम दर्जे के व्यवहार को देखकर कभी-कभी भ्रम होता है कि उत्तरप्रदेश, उत्तरप्रदेश है या पाकिस्तान। उत्तरप्रदेश सरकार के ताकतवर मंत्री और कौमी नेता  मोहम्मद आजम खान के चुनावी क्षेत्र रामपुर में हिन्दू बस्ती को चिह्नित कर, हिन्दुओं के घर तोड़े जाने का तुगलकी फरमान नगर निगम से जारी हुआ। मुसीबत का मारा हिन्दू समाज अपने घरों की हिफाजत करने के लिए सड़क पर उतर आया। आंदोलन शुरू कर दिया। प्रदर्शन किया। धरने पर भी बैठा। लेकिन, सरकार ने अपना रुख नहीं बदला बल्कि प्रदर्शन कर रहे 86 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। आजम खान के दबाव में मुलायम सरकार की छवि लगातार मुस्लिम हितैषी और हिन्दू विरोधी बन गई है। जब कोई जतन काम नहीं आया तो मोहम्मद आजम खान को खुश करके अपने घर बचाने के लिए करीब 100 हिन्दुओं ने धर्म परिवर्तन करना स्वीकार कर लिया। हिन्दुओं के मुसलमान बन जाने से शायद आजम खान का दिल पसीज जाए और गरीब वाल्मीक परिवारों की छत बची रह जाए। उत्तरप्रदेश के रामपुर से आ रहीं खबरें तो ये भी हैं कि अपने घरों को बचाने के लिए हिन्दुओं पर इस्लाम स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया गया। उनके समक्ष सवाल खड़ा किया गया-'घर प्यारा है या धर्म?
बहरहाल, घटना का इतना विवरण इसलिए दिया है, क्योंकि अखबारों और न्यूज चैनल्स पर यह खबर कहीं नहीं है। धर्मांतरण की इतनी बड़ी घटना पर कहीं कोई हंगामा नहीं। सेक्युलर बुद्धिजीवियों की जमात हमेशा की तरह खामोश रही। मॉल की ओर जाने वाली सड़क को चौड़ा करने के लिए गरीबों के घर तोडऩे के फरमान पर वामपंथी ब्रिगेड भी गुड़ खाकर बैठी रही। जबकि आगरा में 'घर वापसी' के घटनाक्रम पर इन सबने आसमान सिर पर उठा लिया था। कभी इसी तरह की मजबूरी में हिन्दू से मुसलमान बने लोग वापस हिन्दू होना भी चाहें तो ये होने नहीं देते। लेकिन, दबाव और लालच से हिन्दू समुदाय का धर्मांतरण करने की घटनाओं पर ये मूक दर्शक बने रहते हैं। इस चयनित सेक्युलरिज्म को क्या नाम दिया जाए? कितने आश्चर्य की बात है कि भारत जैसे देश में हिन्दुओं के सामने ऐसी स्थितियां खड़ी कर दी जाती हैं कि उन्हें अपना घर बचाने के लिए अपना धर्म बदलने का फैसला करना पड़ता है। ऐसी खबर लाहौर से आती है तो आश्चर्य नहीं होता लेकिन, भारत के किसी हिस्से से आए तो शर्मनाक है, आपत्तिजनक है और चिंतनीय भी है। ऐसा तो पाकिस्तान में ही होता है कि हिन्दुओं के घरों पर कब्जा कर लिया जाता है। हिन्दुओं की लड़कियों का अपहरण कर उनका धर्मांतरण किया जाता है। वर्ष 2014 में उत्तरप्रदेश में अपहरण कर हिन्दू लड़की का धर्मांतरण करने का मामला भी सामने आया था। साहब! हिन्दुस्थान को हिन्दुस्थान ही रहने दीजिए पाकिस्तान मत बनाइए। यहां अमन है, वहां संघर्ष है। यहां दोनों समुदायों के बीच मोहब्बत की खिड़कियां खुली हुई हैं, वहां दोनों के बीच कभी न टूटनेवाली दीवार खड़ी हो गई है। यहां सब तरह की आजादी है, वहां बंदिशें ही बंदिशें हैं। यहां लोकतंत्र है, वहां दमनतंत्र है।
एक सवाल हर बार जवाब मांगता है कि हिन्दुओं के साथ उत्तरप्रदेश में इस तरह का भेदभाव किसके इशारे पर किया जा रहा है? क्या यह सांप्रदायिक सद्भाव बिगाडऩे का षड्यंत्र है? या फिर एक मंत्री अपनी ताकत का इस्तेमाल हिन्दुओं को जलील करने के लिए कर रहा है? बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद पर साम्प्रदायिक माहौल बिगाडऩे का आरोप लगानेवालों को सोचना चाहिए कि असल में सांप्रदायिकता के बीज कौन बो रहा है? जरा देखना होगा कि जब से समाजवादी पार्टी सरकार में आई है तब से उत्तरप्रदेश में सांप्रदायिक तनाव की कितनी घटनाएं हो चुकी हैं? सैकड़ों की संख्या में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, कारण क्या है? सरकार किसके दबाव में है और क्यों है? सरकार को तटस्थ रहना चाहिए। किसी खास संप्रदाय के प्रति सरकार का झुकाव सांप्रदायिक तनाव ही बढ़ाता है। इस तरह के मामलों पर उत्तरप्रदेश सरकार को अपनी नीयत साफ रखनी होगी।

भारत में किसी भी सरकार का उद्देश्य लोक कल्याण है। वंचितों और गरीबों के हितों का संरक्षण करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन, उत्तरप्रदेश सरकार अपनी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नहीं कर पा रही है। उक्त घटना से यह भी जाहिर होता है कि सपा सरकार को गरीबों के हित की चिंता नहीं है, उसे तो मॉल की ओर जाने वाली सड़क चौड़ी करनी है। इसके लिए चाहे गरीबों के घरौंदे ही क्यों न तोडऩे पड़ें। आखिर, सरकार के सामने ऐसी क्या मजबूरियां आ खड़ी हुईं कि एक मॉल के रास्ते में आने वाले सैकड़ों परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाने का फैसला लेना पड़ा। क्या गरीब लोगों के घरों से ज्यादा अहम मॉल हो गया है? क्या हिन्दू वाल्मीक बस्ती से ही मॉल का रास्ता निकलता है? सरकार की नीयत में खोट होगा तो ऐसे सवाल उठेंगे ही। घर हिन्दुओं के हों या मुसलमानों के, किसी एक मॉल के लिए नहीं टूटने चाहिए। मॉल वैसे भी लोक कल्याण का उपक्रम नहीं है कि उसके लिए गरीबों से उनकी छत छीनी जाए। मामला और अधिक तूल पकड़े, सरकार की किरकिरी हो, उससे पहले ही ठोस कदम उठाने होंगे। सरकार को दखल देकर नगर निगम का तुगलकी फरमान वापस करवाना चाहिए। इससे भी एक कदम आगे बढ़कर सरकार को अपना रवैया बदलना होगा। उसे सब पंथों के साथ समान रूप से व्यवहार करना चाहिए। और हां, कौमी नेताओं की नकेल भी कसनी होगी। सरकार किसी की जागीर नहीं, सबके लिए है। 
- लेखक युवा साहित्यकार हैं तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में पदस्थ हैं। 
साभार :: http://hn.newsbharati.com

गुरुवार, 23 अप्रैल 2015

स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को सौपा ज्ञापन

स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को सौपा ज्ञापन

जोधपुर 20.04.2015 .सोमवार को मंच के स्थानिय इकाई द्वारा प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में कहा गया हैं कि स्वदेशी जारगण मंच का स्पष्ट मत है कि पिछले लगभग ढाई दशकों से चल रही आर्थिक नीतियों के फलस्वरूप देश की जनता के कष्टों में भारी वृद्धि हुई है, समाज में असमानताओं बढ़ी है, रोजगार के अवसर क्षीण हुए है। और देश का आर्थिक तंत्र छिन्न-भिन्न हुआ है। पिछली सरकार की पूंजीपतियों के साथ मिली भगत के फलस्वरूप कुछ चुनिंदा पूजीपतियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ देने में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठ दिखाई दी। नई आर्थिक नितियों के नाम पर भ्रष्ट तरीकों से पूंजीपतियों को लाभान्वित करने के कृत्यों पर विराम लगाने और देश के आर्थिक तंत्र को पुनः पटरी लाने हेतु वर्तमान सरकार को मिला जनादेश इस आक्रोश का ही परिणाम है। स्वदेशी जागरण मंच ने वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा लागू की गई। वितिय समावेशन विशेष तौर पर जनधन योजना और मुद्रा बैंक की स्थापना सहित कई आर्थिक नीतियों का स्वागत किया।

ज्ञापन के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए विभाग संहसयोजक महेश जांगिड़ ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण पुर्नस्थापना कानून 2013 संशोधन अध्यादेश 2014 के व्यापक विरोध के कारण 2015 के अध्यादेश में विभिन्न संशोधन जैसे प्रत्येक प्रभावित परिवारो में न्यूनतम एक व्यक्ति को रोजगार, जनजाति भूमि का अधिग्रहण न करने, निजी शिक्षण संस्थाओं एवं अस्पतालों के लिए भूमि अधिग्रहित न करने के फैसले के बावजूद भूमि अधिग्रहण  पुनर्वास एवं पुर्नस्ािापना कानून 2013 (संशोधन) अध्यादेश 2015 के मूल में विभिन्न आपतिजनक प्रावधान है, जो किसान, कृषि, खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध है।इस अध्यादेश में कुछ ओर संशोधन करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया गया जिसमें खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु बहुफसली भूमि व सिचिंत भूमि का अधिग्रहण नहीं होना चाहिए।

जांगिड़ ने बताया कि भूमि अधिग्रहण, जी. एम. फसलों के जमीनी परीक्षण पर रोक लगाने तथा ई-काॅमर्स में विदेशी निवेश तथा लघु उद्योगों की श्रेणी को बनाए रखने जैसे प्रमुख 12 निम्न मांगो पर ज्ञापन दिया-
1.    भूमि सीमित साधन होने के नाते टुकड़ों-टुकड़ों में विचार करने के स्थान पर सरकार को इसको उपयोग में लाने का एक समुचित नीति बनानी चाहिए। जिसके अंतर्गत खेती, वन, उद्योग, सड़कों इत्यादि के लिए उपयोग में ला सकने वाली भूमि की सीमा बांधी जानी चाहिए।
2.    स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् आज तक सरकारों द्वारा अधिग्रहित भूमि और बड़े उद्योगपतियों के पास पड़ी बेकार भूमि, उसके वर्तमान उपयोग तथा खाली पड़ी शेष भूमि के बारे में एक श्वेत पत्र जारी किया जाए।
3.    खेती तथा वन भूमि को किसी भी कीमत पर अन्य उपयोगों के लिए अनुमति नही मिलनी चाहिए।
4.    निजी उद्योगों की भूमि आवश्यकता की पूर्ति सरकार की जिम्मेदारी नहीं मिलनी चाहिए।
5.    इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अधिग्रहित भूमि का संयमपूर्वक सदुपयोग होना चाहिए तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों और इंडस्ट्रीयल पार्कस के नाम पर अधिग्रहित भूमि जो अब बेकार पड़ी है, को सर्वप्रथम उपयोग मे लाया जाए।
6.    भूमि अधिग्रहण में किसानों की सहमति सुनिश्चित हो।
7.    भूमि अधिग्रहण से पहले उसकी जरूरत, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन हो।
8.    विभिन्न स्तरों पर जी. एम. खाद्य फसलों के जमीनी परीक्षणों को दी गई अनुमतियों को वापिस लेते हुए, उन पर तुरन्त प्रभावी रोक लगाई जाये।
9.    ई-काॅमर्स में विदेशी कंपनियों को प्रतिबंधित किया जाये।
10.    बीमा मे विदेशी निवेश पर रोक लगाई जाये।
11.    पिछले समय मे सामारिक साझेदारों को सार्वजनिक उद्यमों को बेचने (जैसे माॅर्डन फूड इंस्ट्रीज लिमिटेड, बालकों, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड इत्यादि) के दुष्परिणाम देश देख चुका है। अतः बजट 2015-16 में सामरिक विनिवेश की घोषित नीति का परित्याग किया जाए।
12.    आर्थिक नीतियों में आंतरिक उदारीकरण को प्रोत्साहन देने के साथ लघु उद्योगों को संरक्षण प्रदान किया जाए और लघु उद्योगों की परिभाषा को यथावत रखा जाए।

स्वदेशी जागरण मंच द्वारा ज्ञापन दिये जाने वाले प्रतिनिधि मंडल में अनिल वर्मा, सत्येन्द्र कुमार, ओमाराम जांगू, रामसिंह भाटी, धन्नाराम जोगावत, रोहिताश पटेल, गजेन्द्रसिंह परिहार, विनोद मेहरा, जितेन्द्रसिंह सिणली, राजेन्द्रसिंह मेहरा, लूणाराम सैन, मिथिलेश झा, अशोकसिंह राजपुरोहित, अशोक वैष्णव आदि कार्यकर्ता साथ थे।

शनिवार, 18 अप्रैल 2015

पश्चिमी राजस्थान पाकिस्तान के सीमा से जुड़े जिलों जैसलमेर, बाड़मेर तथा जोधपुर में मसरत आलम के देशद्रोही कृत्य के विरोध में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया

पश्चिमी राजस्थान पाकिस्तान के सीमा से जुड़े जिलों जैसलमेर, बाड़मेर तथा जोधपुर में मसरत आलम के देशद्रोही कृत्य के विरोध में युवाओं  ने विरोध  प्रदर्शन किया
जोधपुर।  पश्चिमी राजस्थान पाकिस्तान के सीमा से जुड़े जिलों जैसलमेर, बाड़मेर तथा जोधपुर में मसरत आलम के देशद्रोही कृत्य के विरोध में युवाओं  ने विरोध  प्रदर्शन किया।   आज के समाचार पत्रों  से कुछ खबरें

साभार:दैनिक भास्कर

साभार:दैनिक भास्कर

साभार:दैनिक भास्कर

सप्ताह का साक्षात्कार - 'संगम से मिली देशहित में जुटने की ऊर्जा'

सप्ताह का साक्षात्कार - 'संगम से मिली देशहित में जुटने की ऊर्जा'

सप्ताह का साक्षात्कार - 'संगम से मिली देशहित में जुटने की ऊर्जा'


संपूर्ण देश में सेवा कार्य करके सच्चे अथोंर् में सेवा का संदेश दे रहे राष्ट्रीय सेवा भारती के कार्यकर्ताओं के विशाल संगम के अवसर पर पाञ्चजन्य ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख श्री अजित
महापात्रा से बात की। प्रस्तुत हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:-

 राष्ट्रीय सेवा संगम के सफल आयोजन के संदर्भ में आप क्या कहना चाहेंगे?
मुझे इस संगम के संपन्न होने पर आनन्द की अनुभूति हो रही है, क्योंकि जैसे मन में कार्यक्रम से पूर्व विचार थे उससे कई गुना अधिक अच्छा कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में पिछले संगम की तुलना में 3 गुना अधिक संख्या रही।
कुल 3 हजार से भी अधिक कार्यकर्ता एवं 800 के लगभग सहयोगी संस्थाओं ने भाग लिया। देश के कोने-कोने से संगम में कार्यकर्ता पधारे थे।

पांच वर्ष पूर्व जब बेंगलुरू में संगम हुआ था और आज जो संगम संपन्न हुआ, इस समय अवधि में सेवा कार्यों का कितना विस्तार हुआ?
इस समय अवधि में हमने प्रत्येक जिले, तहसील और पंचायत तक पहुंचने की कोशिश की है। साथ ही इस पांच वर्षों में हमारे सेवा कार्यों में भी बढ़ोतरी हुई। इस समय हमारे 1,50,000 के लगभग सेवा कार्य हैं। हमने इस समय अवधि में अत्यधिक प्रयास यह किया है कि हम उन सभी क्षेत्रों की पंचायतों तक पहुंचे जहां लोग दु:खी और पीडि़त हैं और काफी हद तक हमारे कार्यकर्ताओं को इसमें सफलता भी मिली है।

देशभर से आए कार्यकर्ता इस संगम से क्या प्रेरणा और क्या उद्देश्य लेकर अपने क्षेत्रों को वापस गए?
जब भी इस प्रकार के संगम आयोजित होते हैं तो वे हमें पे्ररणा देते ही हैं। एक साथ एक स्थान पर विचार साझा होते हैं। हजारों कार्यकर्ताओं से मिलना होता है जो अपने-अपने क्षेत्रों के विशेष होते हैं। संगम में सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि हम सेवा क्षेत्र में निरन्तर कार्य कर रहे हैं और हमारे सेवा कार्यों का लगातार विस्तार भी हो रहा है। लेकिन जैसा उन्होंने कहा, फिर भी इतने सेवा कार्य पर्याप्त नहीं हैं। एक तरीके से यह सेवा कार्य ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। इसलिए आने वाले पांच वर्ष के बाद जो संगम होगा उसमें कार्यकर्ता 3,00,000 सेवा कार्यों के साथ मिलेंगे। ऐसा उनका कार्यकर्ताओं के लिए आह्वान हुआ है। श्री भावगत के इस आयोजन में आने से उनको प्रेरणा तो मिली ही साथ ही उन्हें उद्देश्य भी प्राप्त हो गया। आने वाले दिनों में उन्हें और तेज गति से कार्य करने की ऊर्जा मिली है।

संगम में प्रस्तुत सेवा कार्यों के ऐसे दो उदाहरण बताएं जो आपको अनूठे व प्रेरक लगे हों।
वैसे तो हमारे कार्यकर्ता प्रतिक्षण अनूठे कार्य ही करते हैं और उनके द्वारा किया गया प्रत्येक कार्य प्रेरणा देता है। लेकिन पूर्वोत्तर में हमारे कार्यकर्ताओं द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में अत्यधिक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। आरोग्य रक्षक व आरोग्य मित्र नाम से हमारे कार्यकर्ताओं ने वनवासी क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा देने का कार्य किया है। प्रत्येक व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध हो, इसकी चिंता उन्हें हर समय रहती है। ऐसा नहीं है कि इन क्षेत्रों में कार्य करने वाले कहीं और से आए, बल्कि वहीं के लोगों और वहीं की चीजों का एकत्र करके कार्यकर्ताओं ने समाज के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। आज इस क्षेत्र में लगभग 4,500 युवक-युवतियां सेवाकार्य कर रहे हैं। दूसरा उदाहरण एकल विद्यालय का है, जिसने शिक्षा क्षेत्र में अनूठा कार्य किया है। जहां
शिक्षा का अभाव है, जिन वनवासी बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पाती थी, उन्हें एकल विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति से भी परिचित कराने का काम कर रहे हैं। इस कड़ी में देशभर में 55,016 एकल विद्यालय हैं। इस अभियान से लाखों बच्चों का भविष्य संवरा है। हमारे कार्यकर्ता रात-दिन इन क्षेत्रों में भारत माता की भावी पीढ़ी को दिशा दिखा रहे हैं।

गंगा सेवा संस्था
जैसे गंगा का कार्य है कि वह अपने वात्सल्य से अपने उद्गम स्थल से सागर तक एक बड़े भाग को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ देती है। उसी प्रकार है-गंगा सेवा संस्था। इस संस्था के प्रमुख श्रवण कुमार कहते हैं कि इस संस्था की प्रेरणा आज से 20 वर्ष पूर्व मिली जब विचार आया कि देश के अधिकतर लोग गांवों को छोड़कर रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, गांवों की व्यवस्था और ताना-बाना चरमरा गया है। 1999 में इस संस्था की नींव पड़ी।
आज इसके लगभग 150 से अधिक सदस्य हैं। यह संस्था 'मेरा गांव, मेरा तीर्थ' के भाव को जगाने का काम करती है। संस्था गांव की बहन-बेटियों को स्वावलंबी बनाने के लिए अनेक कार्य करती है। सिलाई-कढ़ाई केन्द्र, कम्प्यूटर केन्द्र, विद्यालय इसके अन्तर्गत चलते हैं। यह संस्था बहन-बेटियों को प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराती है। 

साभार: पाञ्चजन्य

चीन सीमा पर निगरानी को संघ ने तैयार की योजना, बनाए जाएंगे छात्रावास

चीन सीमा पर निगरानी को संघ ने तैयार की योजना, बनाए जाएंगे छात्रावास

देहरादून (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की सीमाओं की सुरक्षा को लेकर नागरिक तथा सरकारों को सचेत करने के साथ ही प्रहरी के रूप में भी कार्य करेगा. जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, युवाओं को जागरूक किया जाए और निगरानी भी की जा सके. इसके लिये प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में छात्रावासों के निर्माण  का निर्णय लिया गया है. चरणबद्ध तरीके से सीमावर्ती जिलों में छात्रावास खोले जाएंगे, इनमें राष्ट्रभक्त छात्र सीमा के सजग प्रहरी के रूप में रहेंगे. संघ ने छात्रावास स्थापना की शुरूआत केदारधार से कर दी है.

उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग आदि जिले चीन की सीमा के नजदीक हैं. चीनियों के आए दिन यहां घुसपैठ की शिकायतें आती रहती हैं. ताजा हालात के मद्देनजर संघ ने सीमा सुरक्षा के प्रति नजरिया बदला है. इन छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को सीमा सुरक्षा के प्रति सजग रहने, गांवों के उत्थान में सहयोग और लोगों में पलायन की प्रवृति दूर करने के लिए काम करने को प्रेरित किया जाएगा.

सीमांत जिलों में छात्रावासों की श्रृंखला का शुभारंभ केदारधार से हुआ है. 9 अप्रैल को यहां छात्रावास के निर्माण के लिये भूमि पूजन किया गया. इस दौरान संघ के क्षेत्र प्रचारक आलोक जी, उत्तराचंल दैवीय आपदा पीडि़त सहायता समिति के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता और अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.

छात्रावासों के निर्माण की योजना संघ दैवीय आपदा पीडि़त सहायता समिति के बैनर तले चला रहा है. छात्रावासों बनाने को लेकर नैटवाड़ बेल्ट, पुरोला, धारचूला, टांस घाटी में योजना पर काम शुरू हो गया है, कुछ सीमांत क्षेत्रों में छात्रावास निर्माण के लिए भूमि तलाशी जा रही है.

छात्रावासों के साथ ही यहां स्वाथ्य केन्द्र की स्थापना, क्षेत्रीय विकास कार्य और समाज सुधार की योजनाओं की शुरूआत भी संघ करेगा. प्रांत प्रचारक डॉ हरीश रौतेला ने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले छात्र सीमांत जिलों में राष्ट्र के सजग प्रहरी के रूप में रहेंगे. सीमावर्ती गांवों में सुविधाओं का अभाव होने से गांव खाली हो रहे है. इस स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रेरित उतरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति द्वारा छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा.

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

इतिहास के गौरवशाली पन्नों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता - मुरलीधर जी

इतिहास के गौरवशाली पन्नों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता - मुरलीधर जी
संस्कृति शोध परिषद के सदस्यों ने तैयार किया कैलेंडर

तिथि पत्रक का विमोचन करते हुऐ प्रान्त प्रचारक माननीय मुरलीधर जी एवं अन्य

जालोर 16अप्रैल 2015 . जालोर के इतिहास संस्कृति को समर्पित जालोर तिथि पत्रक का गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ साधु-संतों के सानिध्य में विमोचन किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक मुरलीधर जी ने एवं भैरुनाथ अखाड़ा के प्रेमनाथ महाराज ने कैलेंडर का विमोचन किया। 

कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्कृति शोध परिषद जालोर के विनोद कुट्टी ने तिथि पत्रक के बारे में जानकारी दी।  संस्कृति शोध परिषद के निदेशक संदीप जोशी ने परिषद का परिचय देते हुए प्रकाशन शोध अध्ययन विभाग के बारे में जानकारी दी। इसके बाद मुकेश सुंदेशा तथा गजेंद्रसिंह ने कैलेंडर का वाचन किया। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक मुरलीधर जी ने कहा कि हम सभी को अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेनी चाहिए। आज हम वर्तमान पीढ़ी को अपने इतिहास का भान करवाकर राष्ट्रीय कार्य में प्रवृत्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास के गौरवशाली पन्नों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता है।

अधिवक्ता मधुसूदन व्यास ने जालोर के एतिहासिक युद्ध प्रसंग के बारे में जानकारी दी।  

प्रेमनाथ महाराज ने परिषद की ओर से किए जाने वाले कार्यों की सराहना करते हुए आशीर्वचन कहे। कार्यक्रम का संचालन नीलम पंवार ने किया। कार्यक्रम के अंत में संजय राठौड़ ने अतिथियों का आभार जताया। कार्यक्रम में वेदपाल मदान, जुगल, सुल्तानसिंह, हुकमाराम गहलोत, कल्पेश बोहरा, रामाराम माली, बालकृष्ण शर्मा, जोगेश्वर गर्ग, सुरेंद्र नाग, रघुनंदन दवे, शांतिलाल दवे, रतन सुथार गजेंद्रसिंह सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

कश्मीरी पंडितों की वापसी से भयभीत कौन?'

कश्मीरी पंडितों की वापसी से भयभीत कौन?'

अलगाववादियों की पीड़ा है कि उन्होंने कितने जतन और षडयंत्रों से कश्मीरी पंडितों को  यहां से भगाया और वे फिर यहां बस जाएंगें। ये वही लोग हैं जो भारत से आजादी चाहते हैं और पाकिस्तानी हुक्मरानों के तलवे चाटते हैं।
संजय द्विवेदी

कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों को वापस बसाने को लेकर अलगाववादी संगठनों की जैसी प्रतिक्रियाएं हुई हैं, वे बहुत स्वाभाविक हैं। यह बात साबित करती है कि कश्मीर घाटी में जो कुछ हुआ, उसमें इन अलगाववादियों की भूमिका और समर्थन रहा है। कश्मीर पंडितों की कालोनी बनाने की बात पर उन्हें यहूदी’ शब्द से संबोधित करना कितना खतरनाक है। यह वहां पल रही घातक मानसिकता और  विचारधारा दोनों का प्रगटीकरण है। कश्मीरी पंडित एक पीड़ित पक्ष हैं, जबकि इजराइल के यहूदी एक ताकतवर समूह हैं। उनसे कश्मीरी पंडितों की तुलना अन्याय ही है। इतने अत्याचार और दमन के बावजूद पंडितों ने अब तक अपनी लड़ाई कानूनी और अहिंसक तरीके से ही लड़ी है। वे हथियार उठाने और कत्लेआम करने  वाले लोग नहीं है। पाकप्रेरित अलगाववादी संगठन घाटी को हिंदुमुक्त करने के  नापाक इरादे में कामयाब हुए तो उन्हें यह लगा कि कश्मीर अब अलग हो जाएगा। 

किंतु हिंदुस्तान के लोग
, कश्मीर के लोग इस हिस्से को भारत का मुकुट मानते हैं। उनके सुख-दुख में साथ खड़े होते हैं, समान संवेदना का अनुभव करते हैं। कुछ मुट्ठीभर लोग इस सांझी विरासत से भरोसा  उठाना चाहते हैं। उन्हें बार-बार विफलता हाथ लगी है और आगे भी लगेगी। क्या कश्मीरी अलगाववादी यह कहना चाहते हैं कि जहां मुसलमान बहुसंख्यक होंगे वहां दूसरे पंथ के लोग नहीं रह सकते?
पाकिस्तान के द्विराष्ट्रवाद पर तमाचा   
कश्मीर दरअसल पाकिस्तान के द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत पर एक तमाचा है। किसी  राज्य में बहुसंख्यक मुस्लिम जनता और भारत का शासन यह पाकिस्तान से बर्दाश्त नहीं होता। हम साथ मिलकर रह रहे हैं, रह सकते हैं, यही पाकिस्तान की पीड़ा है। कश्मीर भारत का सांस्कृतिक परंपरा का अविछिन्न अंग है। हमारे तीर्थ, पर्व, मंदिर, देवस्थल सब यहां हैं। अमरनाथ और वैष्णो देवी से लेकर शंकराचार्य के मंदिर यही कथा  कहते हैं। यह क्षेत्र ऋषियों-मुनियों की तपस्यास्थली रहा है। लेकिन
अलगाववादियों के अपने तर्क हैं। उन्होंने बंदूकों
, अपहरणों, दुराचारों, लूट और आतंक के आधार पर इस इलाके को नरक बनाने की कोशिशें कीं। किंतु हाथ क्या लगा? आज भी वहां एक चुनी हुई सरकार है, जिसमें भारत का एक राष्ट्रवादी दल हिस्सेदार है। यह साधारण नहीं है कि घाटी में भाजपा को वोट नहीं मिले, यह गहरे विभाजन का संकेत है। यह बात बताती है कि एक खास इलाके में किस तरह से
लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा से काटकर देश के खिलाफ खड़ा कर दिया गया है। इस मानसिकता को पालने-पोसने और विकसित करने के जतन निरंतर हो रहे हैं। 

भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियां चलाने वालों को समर्थन देने वाले तत्व आज भी घाटी में मौजूद हैं। भारतीय सेना पर पत्थर फेंकना इसी मानसिकता का परिचायक है। ऐसे असुरक्षित वातावरण में जहां पुलिस और सेना के लोग पत्थर खा रहे हों
, मार  दिए जाते हैं वहां मुट्ठीभर कश्मीरी पंडित किस भरोसे और विश्वास पर बसेंगें? निश्चय ही यह अलगाववादियों की पीड़ा है कि उन्होंने कितने जतन और षडयंत्रों से कश्मीरी पंडितों को यहां से भगाया और वे फिर यहां बस जाएंगें।
ये वही लोग हैं जो भारत से आजादी चाहते हैं और पाकिस्तानी हुक्मरानों के तलवे चाटते हैं।
अब शुरू कीजिए पाक अधिकृत कश्मीर की मांग
कश्मीर की आजादी का सवाल उठाने वाले लोग अब यह अच्छी तरह समझ चुके हैं कि उनकी हसरत पूरी नहीं हो सकती। भारत के लोग कभी यह होने नहीं देंगे। राजनीतिक पहलकदमी से परे हिंसक आंदोलन चलाने वाली ये ताकतें भारत के खिलाफ कश्मीरी मानस में जहर भरने का काम निरंतर कर रही हैं। भारत सरकार भी इनके प्रति नरम रवैया अख्तियार करती रही है। जाने किस कूटनीति के चलते भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर के बारे में बात करनी बंद कर रखी है। जबकि भारत की सरकार को  प्रखरता से आजाद कश्मीर (पाक अधिकृत कश्मीर) के बारे में बात करनी चाहिए।
कश्मीर घाटी ही नहीं हमें पूरा कश्मीर चाहिए यही इस संकट का वास्तविक  समाधान है। राजा हरि सिंह के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर के बाद हुई  राजनीतिक गफलतों ने ही कश्मीर के हालात बिगाड़े हैं। घाटी की हिंदू-सिख आबादी के साथ जो कुछ हुआ उसके भी दोषियों को दंडित करने और उन पर मुकदमे चलाने की जरूरत है। कश्मीरी पंडितों पर जो अत्याचार हुआ
, उसके दोषी आज भी मजे से घूम रहे हैं। 2012 के दंगों पर एक गुजरात की सरकार के पीछे पड़े लोग, क्या कश्मीरियों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ बोलेगें? गुजरात दंगों पर तो सैंकड़ों को जेल और सजा हो चुकी है। क्या कश्मीर घाटी के गुनहगारों पर भी हमारी सरकारों की नजर जाएगी? अपराध-अपराध है उसे चयनित आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। मलियाना के गुनहगारों के लिए सारे मीडिया में स्यापा है। लेकिन कश्मीर में जो हुआ उसे पूरी इंसानियत शर्मिंदा है। सरकार को चाहिए कि ऐसे मानवता विरोधी आतंकियों की पड़ताल कर उनके खिलाफ,उनके मददगारों के खिलाफ मामले खोले और नए सिरे से कार्रवाई प्रारंभ करे। जिन कश्मीरी पंडितों के घरों पर कब्जे करके लोग बैठे हैं, उनके कब्जे हटाए जाएं। भारत की आजादी के बाद शायद ये सबसे बड़ा विस्थापन था, जिसमें 65 हजार कश्मीरी पंडितों को अपना घर छोड़ना पड़ा। भारत औऱ राज्य की सरकार की यह जिम्मेदारी है वे गुनहगारों को कतई माफ न करें।
यहां सिर्फ सेना ही है भारत के साथ
आज चारो तरफ से एक ही आवाज आती है कि घाटी से सेना से हटाओ। सवाल यह उठता है कि क्या सेना को हटाने से कश्मीर में आया अमन-चैन रह पाएगा? क्या इस हिस्से में पुनः आतंकी शक्तियां हावी नहीं हो जाएगीं? लोकतंत्र के मायने मनमानी नहीं होती। किंतु कश्मीरी अलगाववादियों ने इस राज्य को बहुत नुकसान पहुंचाया है। अहमद शाह गिलानी की लंबी हड़तालों, प्रदर्शनों ने राज्य की अर्थव्यवस्था को तो चौपट किया ही है लोगों को जान-माल के खतरे भी दिए। ऐसे नेताओं से लोग अब ऊब चुके हैं। गिलानी भी अब बूढ़े हो चुके  हैं और कश्मीर को भारत से अलग करने का उनका सपना अब तो पूरा होने से रहा। एक चुनी हुई सरकार अब कश्मीर में है। जरूरत इस बात की है कश्मीर को विकास के मोर्चे पर आगे लाकर खड़ा किया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी निरंतर कश्मीर के सवाल को अपनी प्राथमिकता में रखा है। तमाम आलोचनाओं और राजनीतिक मजबूरियों के बावजूद इस राज्य में मुफ्ती सरकार के साथ गठजोड़ किया। यह संकेत बताते हैं कि भारत सरकार इस राज्य के विकास में रोड़े अटकाना नहीं चाहती। किंतु इस पूरे खेल में सिर्फ लेना ही नहीं चलेगा। यह संभव नहीं कि भारत की सरकार आपके हर दर्द में साथ खड़ी हो और आप पाकिस्तान
के झंडे लहराएं। कश्मीर के अलगाववादी तत्वों के साफ संदेश देने की जरूरत है कि वे आतंक
, हिंसा, खून-खराबे, पत्थर फेंकने जैसे सारे हथियार आजमा चुके हैं अब उन्हें चाहिए कि वे लोकतंत्र की खुली हवा में लोगों को सांस लेने दें। ऐसे हालात बनाएं कि सेना बैरकों में जा सके। इसके पहले उन्हें यह भरोसा देना होगा कि घाटी में सेना के अलावा  अब तथाकथित अलगाववादी भी भारत के प्रति प्रेम रखते हैं। हालात यह हैं कि  घाटी में आज भी भारत विरोधी और पाक समर्थक आवाजें गूंज रही हैं। ऐसे समय.  में कश्मीरी पंडितों की वापसी का विरोध करके अलगाववादियों ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। हालांकि श्राइन बोर्ड के जमीन देने के सवाल पर ऐसे ही प्रपंची स्वर सामने आ चुके थे। यह समझना मुश्किल नहीं है कश्मीर का असल संकट घाटी के मुट्ठी पर अलगाववादी हैं, जो
पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर नाचते रहते हैं। उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि ये अलगाववादी कश्मीर की आवाज नहीं हैं। कश्मीर की जनता ने  फैसला कर दिया है
, एक लोकप्रिय सरकार वहां बनी है, उसे काम करने दें। अगर शौक है तो अगले चुनाव में उतरकर अपनी हैसियत आजमा लें।
लोकतंत्र में यही एकमात्र विकल्प है। बंदूकों के साए में आजादी-आजादी की रट लगाने से क्या हासिल है इसे वे अच्छी तरह जानते हैं।
- लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं।

गुरुवार, 16 अप्रैल 2015

भारत की पहचान है हिन्दुत्वः मोहन भागवत

भारत की पहचान है हिन्दुत्वः मोहन भागवत

भागलपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघ चालक मोहन राव भागवत ने कहा कि वर्तमान युवा देश का सर्वांगीण विकास चाहता है और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ना भी चाहता है। जरूरत है कि स्वयंसेवक उनके बीच जाएं और उन्हें संस्कृति तथा राष्ट्र निर्माण की पूरी जानकारी दें। उक्त बातें उन्होंने बिहार एवं झारखण्ड के स्वयंसेवकों के क्षेत्रीय प्रशिक्षण वर्ग को संबोधित करते हुए कही । श्री भागवत ने कहा कि संस्कृति, हिन्दुत्व और राष्ट्र निर्माण के लिए स्वयंसेवक समाज में राष्ट्र भक्ति की रस भरे। उन्हें दायित्व का बोध करायें, क्योंकि आज संपूर्ण समाज के लोग स्वयंसेवकों को आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान हिन्दुत्व से है और हिन्दुत्व जीवनयापन की एक पद्धति है। पर इसका आशय यह नहीं है कि भारत में रहनेवाले अन्य मत के लोगों के हम विरोधी हैं । हम किसी के विरोधी नहीं हैं बल्कि हम हिन्दुत्व समर्थक हैं। सर संघचालक ने कहा कि समाज में फैली कुरीतियां तभी दूर होगी जब हमारे स्वयंसेवक अच्छे कार्यकर्ता बनेगें। कार्यकर्त्ता के बल पर अच्छे समाज का निर्माण होगा। तभी समाज के हर व्यक्ति अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक होगें। उन्होंने कहा कि आज भारत की प्राचीन संस्कृति के आलोक में मौजूदा सामाजिक परिदृष्य को ठीक करने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में संघ का यहीं ध्येय है और प्रत्येक स्वयंसेवक की यह जिम्मेदारी भी है कि वे समाज के हर वर्ग के लोगों में देष भक्ति का जज्बा जगाएं। श्री भागवत ने कहा कि आज विदेशों में रहनेवाले भारतीय युवकों में आशा जगाने का काम संघ ने किया है और इसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं। उन युवकों में अपनी संस्कृति और देशभक्ति के प्रति आस्था बढ़ी है। संघ के इस क्षेत्रीय प्रशिक्षण वर्ग में बिहार और झारखंड के 300 सौ स्वयंसेवक शामिल हो रहे हैं
Source Rajasthan khoj khabar

बुधवार, 15 अप्रैल 2015

जोधपुर प्रान्त में विभिन्न स्थानों पर में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर "समरसता समागम" कार्यक्रम सम्पन्न

जोधपुर प्रान्त में विभिन्न स्थानों  पर में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर "समरसता समागम" कार्यक्रम सम्पन्न  
लाडनूँ में प्रान्त संघचालक ललित जी शर्मा उध्बोधन देते हुए

लाडनूँ सामाजिक समरसता मंच, लाडनूँ द्वारा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर "समरसता समागम" कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे जोधपुर प्रान्त संघचालक माननीय ललित कुमार जी का पाथेय प्राप्त हुआ।

 खिंवाड़ा|कस्बे में मंगलवार को सेवा भारती समिति के तत्वावधान में बालाजी प्रसादी स्थल पर डाक्टर भीमराव अम्बेडकर की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयं संघ के जिला सेवा प्रमुख मंगलदास वैष्णव, अम्बेडकर सेवा संस्थान के संयोजक बस्तीमल सोनल, चिकित्साधिकारी डाक्टर हीरालाल बालोटिया, उपप्रधान किशोरसिंह राजपुरोहित,सरपंच मोहन आचार्य, पूर्व प्रधानाचार्य सोहनलाल सोनल, तुलछाराम घेनड़ी, माणकचंद मारू,एडवोकेट प्रकाश सोनल, महावीर'सिंह ऐलानी आदि मौजूद थे।

देसूरी|डॉ.भीमराव अंबेडकर जयंती सेवा भारती समिति देसूरी के तत्वावधान में मनाई गई। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवा भारती के विभाग मंत्री विजयसिंह माली ने कहा कि डॉ.अंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक है। इस अवसर पर सरपंच प्रवीण कुमार सोलंकी,समिति के इंद्रदास वैष्णव, दीपक आदरा, पूर्व सरपंच मोतीलाल चौधरी, जगदीश प्रजापत, श्रवण सिसोदिया, सत्यनारायण सिसोदिया, रमेश हीरागर आदि मजूद थे। 

बाप| डॉ.भीमराज अंबेडकर मेमोरियल समिति एवं सामाजिक समरसता समिति के संयुक्त तत्वावधान में कस्बे में डॉ. अंबेडकर की जयंती समरसता दिवस के रूप में मनाई गई। स्वामी कृपाचार्य सहित अन्य वक्ताओं ने डॉ. अंबेडर की जीवनी पर प्रकाश डाला। इस दौरान संत गोपालदास, विधायक पब्बाराम विश्नोई, आरएसएस के जिला प्रचार प्रमुख मनमोहन थानवी, तहसीलदार हुकमसिंह, बाप सरपंच पूनम पालीवाल, कल्याणसिंह की सिड्‌ड सरपंच तुलछीदेवी, किशनलाल पालीवाल, रवि पालीवाल, कुंदन मेघवाल, भूराराम मेघवाल आदि उपस्थित थे। 

बालेसर|राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ द्वारा बालेसर कस्बे के डाक बंगले में कार्यक्रम का आयोजन कर डाॅ. भीमराव अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर उनको श्रद्धा से याद किया। इस अवसर पर बालेसर प्रधान बाबूसिंह इंदा ने बाबा साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस माैके पर जुडिया सरपंच हीराराम मेघवाल,राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ  के तहसील संयोजक गंगाराम, सहसंयोजक राजेंद्र पालीवाल, कैप्टन अमरसिंह इंदा, जीएसएस गोपालसर के अध्यक्ष नरपतसिंह इंदा, गिरधारीदान कविया, सहसंयोजक पृथ्वीसिंह आदि कई नागरिक मौजूद थे।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित